प्रजापति युवा जागृति संस्थान, उदयपुर


प्रजापति युवा जागृति संस्थान, उदयपुर प्रजापति समाज उदयपुर के युवाओं द्वारा निर्मित संस्थान है। यह संस्थान मानवता एवं परोपकार के लिए समर्पित होते हुए एक रजिस्टर्ड संस्थान है। संस्था गत 3 वर्षों में राजस्थान में सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्य कर रही है। संस्था द्वारा अब तक प्रतिवर्ष छोटे- छोटे समाज सेवा के कार्य एवं जागरूकता के लिये कार्यक्रम आयोजित किये जाते रहे है।

जैसे रक्तदान शिविर, पौधारोपण, सामाजिक कुरीतियों पर परिचर्चा, राष्ट्रीय पर्व, सामाजिक उत्सवों/पर्वो पर कार्यक्रम रखे जाते है। संस्थान अपने निस्वार्थ भाव से समाज के उत्थान के लिए विभिन्न कार्यों को करने के लिए कार्य करना चाहता है।

संस्थान का कार्य क्षेत्र मुख्यतया उदयपुर जिला ही है। संस्थान उदयपुर जिले के प्रजापति समाज के सभी युवाओं को जोडने हेतु प्रतिज्ञाबद्ध है एवं इस हेतु संस्थान द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है।

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श्री श्रीयादे माता का जीवन परिचय


पुराणों के अनुसार त्रेता युग के प्रथम चरण में हिरण्यकशिपु राज्य मूल स्थान (मुल्तान) पंजाब पाकिस्तान में स्थित है, के समय अधर्म का नाश करने के लिये एवं भक्ति की महिमा एवं उसके उद्भव के लिए नरहरि खण्ड के अझांर नगर में भगवान शंकर ने कुम्हार उडनकेशरी व माता उमा ने श्रीयादे देवी के रूप में असोज मास की शरदपूर्णिमा के दिन दिव्य रूप में इस धरती पर अवतरित हुए।

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संस्था द्वारा अब तक के कार्यक्रम


संस्था गत 3 वर्षों में राजस्थान में सामाजिक एवं शैक्षणिक कार्य कर रही है। संस्था द्वारा अब तक प्रतिवर्ष छोटे- छोटे समाज सेवा के कार्य एवं जागरूकता के लिये कार्यक्रम आयोजित किये जाते रहे है।

प्रेरणादायी पौराणिक कथा

यूं निकले कुम्हार के घडे़ से कान्हा

एक बार की बात है कि यशोदा मैया प्रभु श्री कृष्ण के लिए मिलने वाले उलाहनों से तंग आ गई और छड़ी लेकर कृष्ण की ओर दौड़ी । प्रभु ने उन्हैं क्रोध में देखा तो वह अपना बचाव करने के लिए भागने लगे। भागते-भागते कृष्ण कुम्हार के पास पहंुचे। कुम्हार तो मिट्टी के घडे बनाने में व्यस्त था, लेकिन जैसे ही कृष्ण को देखा तो बहुत प्रसन्न हुआ। वह जानता था कि श्रीकृष्ण साक्षात परमेश्वर है। प्रभु ने कुम्हार से कहा आज मेरी मैया मुझ पर बहुत क्रोधित है, छड़ी लेकर मेरे पीछे आ रही है। भैया मुझे कहीं पर छुपा लो। तब कुम्हार ने कृष्ण को एक बडे से मटके के नीचे छिपा दिया। कुछ ही क्षणों में मैया यशोदा भी वहां आ गई और कुम्हार से पूछने लगी -क्यूं रे! तूने मेरे कन्हैया को कहीं देखा है क्या ? कुम्हार ने कह दिया नहीं मैया । मैने कन्हैया को नहीं देखा।